
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती: सरयू के किनारे धधकती ‘मौत की भट्ठियाँ’, छावनी पुलिस के प्रहार से माफियाओं में हड़कंप
- ‘सुविधा शुल्क’ के दम पर फल-फूल रहा था कारोबार, छावनी पुलिस ने तोड़ी अवैध शराब माफियाओं की कमर
- बस्ती: क्या सिर्फ पुलिस के भरोसे रुकेगा शराब का जहर? आबकारी विभाग की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
- सरयू किनारे पुलिस का ‘ऑपरेशन भट्ठी’: 220 क्विंटल लहन नष्ट, माफियाओं में मचा हड़कंप
बस्ती। जनपद में अवैध शराब का कारोबार किस कदर पैर पसार चुका है, इसकी बानगी छावनी पुलिस की हालिया कार्रवाई में देखने को मिली। सरयू नदी के किनारे बरसों से फल-फूल रहे अवैध शराब के साम्राज्य पर छावनी SHO राणा डीपी सिंह ने न केवल चोट की, बल्कि माफियाओं की कमर तोड़कर रख दी। पुलिस की इस दबंग कार्रवाई से पूरे इलाके के शराब माफियाओं में भगदड़ मची है।
पुलिस की दबिश और तबाही का मंजर
छावनी पुलिस ने गोपनीय सूचना के आधार पर सरयू मांझा क्षेत्र में छापेमारी की। पुलिस टीम ने वहां चल रही अवैध शराब की कई भट्ठियों को मौके पर ही ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई में 120 लीटर अवैध कच्ची शराब और करीब 220 क्विंटल लहन को नष्ट किया गया। पुलिस ने मौके से नौसादर, यूरिया, शराब बनाने के उपकरण, ड्रम और अवैध कारोबार में प्रयुक्त की जा रही एक बाइक भी अपने कब्जे में ले ली है। हालांकि, छापेमारी की आहट मिलते ही माफिया खेतों और खलिहानों के रास्ते अंधेरे का फायदा उठाकर फरार होने में सफल रहे।
11 नामजद, तलाश जारी
इस मामले में पुलिस ने 11 नामजद आरोपियों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। SHO राणा डीपी सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है और उन्हें जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
आबकारी विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
इस बड़ी कार्रवाई ने एक बार फिर आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों में यह चर्चा आम है कि यदि पुलिस की तरह आबकारी विभाग ने भी सक्रियता दिखाई होती, तो यह कारोबार वर्षों पहले बंद हो गया होता। लोगों का आरोप है कि विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कथित रूप से ‘सुविधा शुल्क’ लेकर अवैध शराब के धंधे को संरक्षण दे रहे हैं।
क्या सिर्फ पुलिस के भरोसे नकेल?
छावनी पुलिस की इस सख्ती ने अवैध शराब के कारोबारियों की नींद उड़ा दी है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ पुलिस की इक्का-दुक्का छापेमारी से यह अभिशाप खत्म होगा? जब तक आबकारी विभाग अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेगा और स्थानीय स्तर पर मिलीभगत का खेल नहीं थमेगा, तब तक सरयू किनारे धधकने वाली ये ‘मौत की भट्ठियाँ’ पूरी तरह शांत नहीं हो सकेंगी।
पुलिस की इस कार्रवाई की चहुंओर प्रशंसा हो रही है, लेकिन अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन आबकारी विभाग के उन अधिकारियों पर भी कोई कार्रवाई करेगा जिनकी नाक के नीचे यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा था?






















